मालवी कविता
या विनती करू नाना होण मत पियो यो डोलों पाणी ( दारू )
या विनती करू नाना होण मत पियो यो डोलों पाणी
जवानी में डोकरा हुई जावगा उडी जायगो मुंडा को पाणी
कुटम तमारो बखरी जावेगो उतरी जायगो इज्जत को पाणी
या विनती करू नाना होण मत पियो यो डोलों पाणी
बिरादरी में दारूडया केवाव्गा छुटी जावेगो दानो पाणी
छोरा छोरि बागड़ी जावेगा उडी जावेगो आख को पाणी
बाईरा रोवेगी जादे यो ड़ोलो पाणी बनेगो दिल किए राणी
या विनती करू नाना होण मत पियो यो डोलों पाणी
यो ड़ोलो पाणी एसो पाणी जीकी दुनिया दिवाणी
बाप दादा की जायदाद खाई गयो यो ड़ोलो पाणी
यो ड़ोलो पाणी पि के लोग चाटे नाली को पाणी
या विनती करू नाना होण मत पियो यो डोलों पाणी
मालवा का लोग एसा लोग जिनकी आख में पाणी
याद अहिल्या राणी जीमे थो न्याय को पाणी
बेटो मर्वयो हाथि से नि उतरने दिओ राज को पाणी
या विनती करू नाना होण मत पियो यो डोलों पाणी
तमारे पिणों ज हे तो पियो माँ बाप की सेवा को पाणी
लाओ शारीरिक ने मानसिक ताकत चमकाओ मुंडा को पाणी
बड़ाओ देश की आन बान और शान को पाणी
या विनती करू नाना होण मत पियो यो डोलों पाणी
